बिल्हा -जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुड़ीपार में आरटीआई आवेदनों का उड़ता है मखौल।

मुड़ीपार में आरटीआई आवेदनों का उड़ता है मखौल

आखरीदिन कर देते है खारिज अपील में भी नही होती सुनवाई

बिलासपुर/बिल्हा—:एक तरफ जहाँ देश कि सर्वोच्च अदालत स्वयं को आरटीआई के दायरे में सामिल करने के पक्ष में आदेश दे रही है वही इस कानून का पंचायत स्तर पर किस तरह उल्लंघन हो रहा है इसका एक उदहारण बिल्हा ब्लाक का मुड़ीपार पंचायत है मुड़ीपार पंचायत में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास स्वच्छता परियोजना के तहत सौचालय निर्माण में व्यापक अनियमितता के मामले लंबित है कई हितग्राहियों ने जनपद में अपने ही सरपंच कि आर्थिक अनियमितता पर सिकायते कि है आजकल केवल आरोप लगा देने से काम नही बनता लिहाजा पुरे आर्थिक अनियमितता को सिद्ध करने के लिए दस्तवेज जरुरी है और दस्तावेज प्राप्त करने का एक मात्र तरीका सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन देना है किन्तु मुड़ीपार में सुचना अधिकारी इतना शालीन है कि उसने आवेदक के 18 आवेदन पत्र सिर्फ यह कहकर वापिस कार्ड दिए कि आवेदक को मांगी गई जानकारी देने का प्रावधान नही है जबकी आवेदक ने ग्राम पंचायत के सुचना अधिकारी से बेहद सामान्य जानकारी “निर्मित सौचालय के निर्माण सामाग्री का बिल एवं वाउचर ही मांगा था यहाँ तक कि ग्राम पंचायत योजना के लाभान्वित हितग्राहियों कि सूचि भी नही देता जबकभी भी इन प्रकरणों में प्रथम अपील प्रस्तुत कि गई तो वहां भी प्रथम अपीलीय अधिकारी ने पहले तो निर्धारित समय सीमा तक मामले को खींचा और अंत में प्रकरण को ख़ारिज कर दिया ऐसा लगता है कि जहाँ एक ओर बड़े सरकार दफ्तरों में पारदर्शिता कि बात कि जा रही है वही दूसरी ओर पंचायत स्तर पर लाखो कि राशि का घपला कर सूचनाओ को न देने के बहाने खोजे जाते है आम तौर पर आवेदक प्रथम अपील के बाद द्वितीय अपील में इस लिए नही जाता कि अपील राज्य सुचना आयोग रायपुर के समक्ष पेश करनी होती है और रायपुर बिलासपुर कि दुरी 100 किमी है और आवेदक इस अतिरिक्त खर्च को वहननही कर पाता जबकि ऐसा भी देखा और सूना जा रहा है कि प्रथम अपील में आवेदनपत्र खारिज करने कि आड़ में प्रथम अपील अधिकारी सरपंच से लेनादेना कर लेते है तभी आवेदन पत्र खारिज करते है

vandana