राशनकार्ड वितरण का सोसियल मिडिया पर का रहे है जोरदार प्रचार।

राशनकार्ड बांटकर राजनैतिक गोटियाँ बैठाल रहे है अधिकार विहीन हो चुके घुरू सरपंच

राशनकार्ड वितरण का सोसियल मिडिया पर का रहे है जोरदार प्रचार

 बिलासपुर—:राशनकार्ड का खेल राजनितिक दल और जनप्रतिनिधि खुब करते है जब उत्तरदायित्व का प्रश्न आता है तो जिम्मेदारी को दुसरे पर टालते है और जब श्रेह लेने कि बारी आती है तो आगे बढ़ बढ़ कर फोटो खिचाते नजर आते है हम बात कर रहे है हाल ही बने राशनकार्ड के वितरण कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहले कई दिन तक राशनकार्ड को बनवाने के बहाने वोट बैंक को साधते रहे और फिर जब कार्ड बनकर आगया तो बाटने कि राजनीति सुरु हो गई सभी जानते है कि बिलासपुर जिले कि 15 ग्राम पंचायतो का विलय निगम सीमा में हुआ है इनमे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बिल्हा है इन क्षेत्र में पहले तो सरपंच अपना हिसाब किताब जमा करना नही चाहते थे बाद में जब चेतावनी एफआईआर तक पहुंची तो बसते का मोह छूटा किन्तु कहावत है चोर चोरी से जाए सीनाजोरी से नही जाता यह कहावत इन सरपंच पर बिल्कुल ठीक बैठती है पद जाने के बाद पहले फर्जी बिल बनाकर लाखो रुपए का लेनदेन केलिए जिला पंचायत पर दबाव बनाया जब काम नही बना तो दो कदम पीछे खीच लिए बाद में मामला ठंडा होगया तो उन राशन कार्डो कि  थप्पी लेकर बाटने का दरबार लगा लिया जबकि ये राशनकार्ड मिले हुए दो हफ्ते से ज्यादा हो चुका है साफ़ बात है कि कार्ड मिलते ही दे देते तो कौन मतदाता याद रखता कि राशन कार्ड किसके हाथो मिला घुरू सरपंच को तो चुनाव लड़ने कि इतनी तीव्र इच्छा है कि उन्होंने कार्ड वितरण के लिए न तो किसी भी विभाग के सरकारी अधिकारी को बुलाया न ही अपनी पार्टी के किसी वरिष्ट नेता को बुलाना उचित समझा हमने जब इस सन्दर्भ में संयुक्त संचालक पंचायत से बात कि तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो पंचायते निगम में मर्ज हो चुकी है उन सरपंचो के सभी अधिकार समाप्त हो चुके है ऐसे में किसी भी शासकीय अर्धशासकीय पेहचान पत्र को बाटने का कोई अधिकार नही है सरपंच राशनकार्ड बाट रहा है इस पर अन्य अधिकारी एक दुसरे को उत्तरदायी ठहराते रहे निगम आयुक्त के अनुसार जनपद सीईओ उत्तरदाई है और जिला पंचायत सीईओ के अनुसार राशनकार्ड कि वितरण कि जिम्मेदारी निगम कि है क्योकि पंचायत अब निगम में मर्ज हो चुकी है असल में यह पूरा खेल एक सरपंच कि अतिमहत्वकांक्षा से जुडा है सूत्र बताते है कि कुछ सरपंच तो मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सिर ऊपर छत का काज भी दबा कर बैठे है और वक्त आने पर इस कागज़ के बदले में वोट का सौदा कर सकते है।

vandana