स्थानीय निकाय चुनाव की दहलीज पर खड़ा बिलासपुर।

स्थानीय निकाय चुनाव की दहलीज पर खड़ा बिलासपुर कोई नहीं कर रहा 15 सालों की कामों की समीक्षा…

बिलासपुर:- कांग्रेस-भाजपा दोनों राजनीतिक दल धान को आंदोलन का विषय बना कर नगरीय स्थानीय निकाय चुनाव में उतरना चाहते थे। किंतु दोनों ही दलों की यह रणनीति बिगड़ेगी जब राष्ट्रीय परिदृश्य में एक ऐसा फैसला आ गया जिसमें दोनों को आंदोलन धरना प्रदर्शन से दूर रहने के लिए बाध्य कर दिया अब अन्य कोई ऐसा राजनीतिक मुद्दा नहीं जिसे लेकर प्रभावशाली आंदोलन चल रहा हो।या चलाया जा सके बिलासपुर नगर पालिक निगम के हालात बद से बदतर है। ढाई करोड़ रुपए प्रतिमाह​ भुगतान के बावजूद शहर साफ नहीं रह पाता पिछले 18 – 19 वर्षों मे मात्र एक वक्त ऐसा आया जब निगम में वाणी राव कांग्रेश की निर्वाचित महापौर थी किंतु सदन में बहुमत भाजपा का रहा। इसके बावजूद जिला और शहर कांग्रेस कमेटी स्थानीय मुद्दों को लेकर कोई धारदार आंदोलन खड़ा नहीं कर पा रहे। उल्टे समय-समय पर अमृत मिशन, सीवरेज और रोड के कार्यकलाप जिस तरह से खबर बनते हैं वह कांग्रेस के खिलाफ जाता है। स्थानीय स्तर पर पिछले 9 माह में निगम की ऐसी कोई उपलब्धि नहीं है जिसे लेकर कोई जनप्रतिनिधि जनता के समक्ष जाए और अपने पक्ष में मतदान का निवेदन करें। भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधि और उनके निर्देश पर काम करने वाले निगम के अधिकारियों में जो काम किए अब उनकी कलाई खुल रही है। शहर के भीतर कम से कम ऐसे 4 उदाहरण है जब किसी निजी भूमि पर निगम ने निर्माण कर दिया सरकारी धन का दुरुपयोग कर दिया और बाद में न्यायालय में मुंकी खाई अब जब निगम का खजाना खाली है तो उसकी नजर मिशन की जमीनों पर लग गई है जिसका असल मालिक नजूल होता।
vandana