स्थानीय निकाय चुनाव कि बिसात से हल और झाड़ू नदारत।

स्थानीय निकाय चुनाव कि बिसात से हल और झाड़ू नदारत

 

बिलासपुर—:छत्तीसगढ़ राज्य में विधानसभा चुनाव को हुए एक साल ही बिता है वर्ष 2018 के चुनाव में 5 बड़े राजनितिक दल मैदान में अपना अपना दावा कर रहे थे चुनाव के अंतिम समय में अजित जोगी कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और मायावती बहुजन समाज पार्टी के मध्य समझौता हो गया था शेष 3 राजनितिक दल कांग्रेस भजपा और आप ने अपने अपने स्वतंत्र चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में मोर्चा सम्हाला था कम से कम बिलासपुर जिले में अजित जोगी कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने कितना बढ़िया प्रदर्शन किया कि कोटा मरवाही और लोरमी में उसके विधायक जीतकर आय है बिलासपुर विधानसभा कि नजदीकी क्षेत्र बेलतरा में जोगी के प्रत्याशी को 29 हजार से अधिक वोट मिला कमोबेश यही स्थिति तखतपुर में भी थी किन्तु आश्चर्य कि बात यह है कि निगम चुनाव में न तो हल जोतता किशान दिखाई दे रहा है न ही झाड़ू लगती दिख रही है यहाँ तक कि इन राजनैतिक दलों कि ठंडी स्थिति देखकर वे दावेदार भी परेशान है जिन्हें ऐसा लगता था कि यदि अपने राजनितिक दल से टिकिट नही मिली तो ये दो राजनितिक दल अच्छा विकल्प हो सकते है पिछले 5 माह जोगी कांग्रेस के लिए भारी बीते है पहले पार्टी केर सुप्रीमो अजित जोगी का जाती विवाद वे हार गए और अब मामला उच्च न्यायालय में है उनके विरुद्ध एक प्राथमिकी भी दर्ज है जिसमे गिरफ़्तारी पर कोई स्थगन नही है पुर्व विधायक जन्म प्रमाण पत्र मामले को लेकर जेल यात्रा कर चुके है जमानत पर है कुलमिलाकर जोगी कांग्रेस कि स्थिति वाकई बुरी है और इससे और ज्यादा कठिन हो ही नही सकती ऐसे में उनके पास दो ही रास्ते थे या तो वे संघर्ष कर के स्थानीय निकाय चुनाव में दमदारी के साथ उतरे और जनता के बीच अपनी लोकप्रियता को एक बार फिर से दिखाए बिलासपुर में इतने मुद्दे है कि जनता के पास सीधे संपर्क पर प्रत्याशी अपना प्रभाव तो डाल ही सकता है विधानसभा चुनाव के बाद जोगी कांग्रेस कि डामाडोल स्थिति को देखकर ही उनका एक एक पार्षद धीरे धीरे खिसक कर कांग्रेस में चला गया जब पार्षद खिसक रहे थे तब जोगी परिवार न्यायलय में व्यस्त था अब स्थिति यह है कि शहरी राजनीती में उनके सबसे वफादार समीर अहमद बबला भी राजनीती में रूचि लेते नही दीखते घोषित रूप से वे अमित जोगी के राजनितिक सलाहकार भी है जिसे राजनीती में रूचि ही न हो वह अपने नेता को क्या सलाह देगा वह दिखाई दे रहा है दूसरी ओर आप राजनितिक दल कि कमान बिलासपुर में जसबीर और शैलेश आहूजा के पास थी ये दोनों चेहरे विधानसभा तक बढ़ बढ़कर दावे करते थे कि राजनीती कि दिशा को बदल देंगे किन्तु ऐसा लगता है कि इन्होने रास्ता ही बदल दिया आज आप राजनितिक दल को नेत्रित्व प्रदान करने वाला कोई नही है ऐसे में इस बात कि संभावना बेहद क्षीर्ण है कि कोई व्यक्ति हवा के विपरीत जाकर झाड़ू उठाएगा।

vandana