गुटों में बटे कांग्रेसी नेताओं से कई प्रश्न पूछने बेताब है मतदाता?…

गुटों में बटे कांग्रेसी नेताओं से कई प्रश्न पूछने बेताब है मतदाता

 

बिलासपुर—:पुरे प्रदेश के साथ बिलासपुर में भी 30 नवंबर से स्थानीय निकाय चुनाव कि प्रक्रिया शुरू हो गई है देखने लायक बात यह है कि शहर एवं जिला कांग्रेस के पदाधिकारीयो तथा नेताओं ने अनुशासन का पाठ पढ़ा है या नही यदि इस बार भी वे गुटबाजी के साथ स्थानीय निकाय चुनाव में उतरे तो प्रदेश के सीएम श्री बघेल का यह प्रयास कि बिलासपुर में कांग्रेस का महापौर हो ध्वस्त हो सकता है.विधानसभा चुनाव के समय से ही शहर कांग्रेस में गुटबाजी स्पष्ट दिख रही है जहाँ पहले शहर कांग्रेस में दो गुट थे अब 4 गुट हो गए है पहला वे नेता जो कांग्रेस के है दुसरा महामंत्री गुट तीसरा विधायक गुट और चौथा वे नेता जो कुछ दिन पुर्व तक हल जोत रहे थे और अब हल को छोड़कर पंजा दिखा रहे है इन स्थितियों तथा अंतरविरोधो के साथ यदि पार्टी शहर सरकार के चुनाव में उतरी तो उन्हें खामियाजा उठाना पडेगा राज्य में कांग्रेस कि सरकार बने 1 वर्ष हो गया है और देखने लायक बात यह है कि इस एक वर्ष में शहर के लिए राज्य सरकार ने क्या किया निगम का सिमा विस्तार बघेल के लिए उपलब्धि है तो अपनी दो घोषनाओ को अमलीजामा नही पहना सके जिनमे पहली है विकास प्राधिकरण का गठन और दूसरी है निगम के खजाने में घोषित किया गया 10 करोड़ जिसमे से अचारसहिता लागू होने के पहले सिर्फ दो करोड़ ही मिला एक वर्ष में बिलासपुर आगे बढ़ने के स्थान पर पीछे ही गया है सीवरेज योजना,अमृत मिशन स्मार्ट सिटी प्लान जैसी बड़ी योजनाओं के साथ दर्जन भर घोषणाओ को अमलीजामा नही पहनाया जा सका.यहा तक कि इस एक वर्ष में उच्च न्यायलय के उस आदेश को भी पूरा नही किया जा सका जिसमे न्यायधीश महोदय ने गौरवपथ भ्रष्टाचार मामले में निगम के 3 आईएएस आयुक्त 18 इंजीनियर और 3 ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर होनी थी निगम के अधिकारी सीवरेज के उत्तरदाई दोनों कंपनी सिप्लेक्स और मेनहंट के ऊपर मात्र जुरमाना अधिरोपित करते रहे और कंपनियां बिलासपुर छोड़कर भाग गए इस हफ्ते जब कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी जब वार्ड में जाएँगे तो उसके पुर्व उन्हें इन प्रश्नों के उत्तर खोज लेने चाहिए ।

vandana