छवि खराब करने की धमकी से चिंतित है पंचायत प्रत्याशी…?

छवि खराब करने की धमकी से चिंतित है पंचायत प्रत्याशी

नामांकन के पूर्व एक-एक वार्ड में बरसने वाले हैं लाखों

बिलासपुर:- व्हाट्सएप , फेसबुक और टिक टॉक जैसे सोशल मीडिया के हथियारों से जीतना नगरीय निकाय चुनाव प्रभावित नहीं हुआ उससे ज्यादा प्रभाव ग्राम पंचायत के चुनाव में पड़ने वाला है सोशल मीडिया से प्रत्याशी की छवि परिष्कृत हो या ना हो अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी मात्र से ग्रामीण प्रत्याशियों की नींदे उड़ गई है वर्ष 2020 में चुनाव होगा 2 वर्ष पूर्व किसी ने व्हाट्सएप या फेसबुक पर किसके बारे में क्या लिखा किसने किसको गालियां दी उस समय किसी को नहीं पता था कि इसे कोई ना कोई रिकॉर्ड में रख रहा है आज वही लिखा हुआ प्रत्याशियों को भारी पड़ने वाला है राजनीति में एक दूसरे की छवि बनाने बिगाड़ने में पहले समाचार पत्रों की भूमिका हुआ करती थी फिर चैनल व स्थानीय चैनल का दौर आया और अब हथेली पर 5 ईन्च की स्क्रीन हार जीत का फैसला कर देती है जितना छोटा चुनाव छवि का बनना बिगड़ना उतना आसान ग्राम पंचायत चुनाव में पंच सरपंचों के पैर के नीचे अनगिनत केले के छिलके व बबूल के कांटे बिखरे पड़े हैं प्रत्याशी एक दूसरे के खिलाफ रोज नहीं हवा फैलाते हैं और यही अफवाहें ग्रामीण समरसता में कड़वाहट घोल रही है।

आसमान से गिर रहा रुपैया

          मतदाता मदमस्त पंचायत चुनाव का नगाड़ा बजते ही मोहल्ला,टोला से लेकर बाजार तक रुपयों की बरसात हो रही है प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरने के पहले ही वार्ड के प्रत्येक घर में 1 किलो मिठाई का डब्बा व डिब्बे के अंदर पांच – पांच सौ के दो नोट घर घर भिजवा रहा है यह तो आरंभ है नामांकन रैली में जाने की न्यूनतम कीमत तय है किंतु यहां लिंग के आधार पर मतभेद है पुरुष की कीमत 200 रूपए और दो समोसा और महिला कार्यकर्ताओं को100रूपए और दो समोसा निर्धारित है यहां पर एक अंतर और है नामांकन रैली में डीजे की धुन पर सड़क पर नाचने का अतिरिक्त भुगतान मिलता है जो सिर्फ महिलाओं के नसीब में है चुनाव के नगाड़े के बाद चखना सेंटर की बिक्री बढ़ी है किंतु शराब की दुकानों पर भीड़ कम हो गई है क्योंकि शराब अब दुकान पर नहीं चुनाव लड़ने वाले के घर पर मिल जाती है पाठक कल्पना कर सकते हैं कि पंच चुनाव में एक पंच न्यूनतम 4 लाख रुपया खर्च कर रहा है 1 वार्ड में कम से कम तीन प्रत्याशी मैदान में है तो आने वाले 10दिन के भीतर एक वार्ड में 12 लाख रुपए 300 से 400 मतदाता के बीच खर्च होने वाले हैं इसे लोकतंत्र के दिवाली कहा जा सकता है जिसमें आहुति देसी घी से हो रही है और कल तक जो नागरिक चखने के रूप में नमक खा रहे थे अब काजू की उम्मीद कर रहे हैं इस समय नागरिकों को प्याज भी सस्ती लग रही है क्योंकि वह अपने पैसों से नहीं खरीदनी है इसलिए मुर्गा और बकरा का स्वाद दुगना हो गया।

vandana