शहर अध्यक्ष का विलाप मुझे हराया रमन ने जनता द्वारा नकार दिए जाने के बाद अब संगठन छूटने का भी भय…?

शहर अध्यक्ष का विलाप मुझे हराया रमन ने

जनता द्वारा नकार दिए जाने के बाद अब संगठन छूटने का भी भय

 

बिलासपुर शहर कांग्रेस को स्थानीय निकाय चुनाव में सफलता मिली किन्तु उसकी गुटबाजी और आरोप प्रत्यारोप है कि थमने का नाम ही नही ले रहे शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य मंत्री के सामने अपने हार का ठीकरा नगर विधायक पर फोड़कर अपनी राजनैतिक अपरिपक्वता का परिचय दिया जो यह बताता है कि शहर अध्यक्ष राजनीती के कच्चे खिलाड़ी है नवनिर्वाचित महापौर और उनके साथ सभापति कांग्रेस महामंत्री शहर अध्यक्ष कार्यकारी अध्यक्ष मुख्य मंत्री से मिलने गए थे जहाँ पर सीएम ने एक सहज प्रश्न शहर अध्यक्ष से पूछा था चुनाव कैसे हार गए ..?मानो शहर अध्यक्ष तो भरे बैठे थे उन्होंने शहर विधायक के साथ रमन यूनिवर्सिटी को भी लपेट लिया ये वि वीवी.जिसकी दुरी उनके वार्ड से 24 किमी है उन्होंने आरोप लगाने के पहले यह भी नही सोचा कि टिकिट और वार्ड उन्होंने चुना था कांग्रेस का कोई वरिष्ट पदाधिकारी उनकी चौखट पर पीले चावल लेकर चुनाव लड़ने का निवेदन लेकर नही गया था वर्ष 2014-15 में जब स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे थे और बिलासपुर के प्रभारी पीआर.खूंटे थे तब भी कांग्रेस हारी थी और शहर अध्यक्ष जो आज है वही थे उसके भी पुर्व जब शेख गफ्फार और अशोक पिंगले के मध्य महापौर कि सीधी टक्कर थी आज के शहर अध्यक्ष ने पार्षद का चुनाव लड़ा था और हारे थे उनके शहर अध्यक्ष रहते कांग्रेस निगम चुनाव हारी है लोकसभा चुनाव हारी और वे स्वयं तथा उनका ब्लाकअध्यक्ष भी चुनाव हारा है असल में दोहरी जिम्मेदारी शहर अध्यक्ष को भारी पड़ गई जब तक वे शहर अध्यक्ष थे उन्होंने स्वयं को बड़ा नेता माना और अपनी जमीन किसी एक वार्ड में मजबूत नही कि वे तो स्वयं को विधायक और सांसद स्तर का नेता मानते थे सत्ताधारी दल का पदाधिकारी होने के कारण उन्हें ऐसा लगता रहा कि चुनाव जितना आसान है यही भ्रम उन्हें ले डूबा इस भ्रम के शिकार वे अकेले नही हुए जिस भी नेता को यह भ्र्म्हो जाता है वह चुनाव हरता ही है भाजपा और कांग्रेस सहित सभी राजनैतिक दलों में ऐसे कई उदाहरण भरे पड़े है असल मे अध्यक्ष को पार्षद चुनाव हारने के बाद संगठन से भी पद चले जाने कि संका है और इसी संका में वे विलाप कर रहे है जो मुख्य मंत्री के सामने फूटा 

vandana