बिलासपुर:-विदेशी सरजमीं पर व्याख्यान न दे सके चंद्रशेखर सरकारी षड्यंत्र का खामियाजा भुगतेगा लोकतंत्र

विदेशी सरजमीं पर व्याख्यान न दे सके चंद्रशेखर

सरकारी षड्यंत्र का खामियाजा भुगतेगा लोकतंत्र

बिलासपुर :- देश के भीतर जाति की राजनीति खूब होती है किंतु इस पर सीधी बात कोई नहीं करता शायद यही कारण है कि एक बाहरी विश्वविद्यालय से जब आजाद समाज पार्टी के सुप्रीमो चंद्रशेखर आजाद को जातिगत राजनीति और भारतीय लोकतंत्र पर व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया तो आजाद के खिलाफ सरकार ने ऐसे षड्यंत्र किए की वह भारतीय लोकतंत्र व जातिवाद विषय पर विश्वविद्यालय में व्याख्यान देने के स्थान पर जेल में नजर आएं यह पूरा वाक्य फरवरी माह का है खबरों पर नजर डाले तो इसी माह चंद्रशेखर ने अपना नया राजनीतिक दल गठन करने का भी ऐलान किया था और वह इसी तैयारी में था इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि चंद्रशेखर की गतिविधियों ने ना केवल उत्तर प्रदेश सरकार बल्कि केंद्र सरकार के नाक में भी दम कर रखा है ऐसे में यदि किसी विदेशी विश्वविद्यालय मैं चंद्रशेखर को जातिवाद की राजनीति और भारतीय लोकतंत्र जैसे संवेदनशील विषय पर बोलने मिलता तो प्रजातांत्रिक देश में क्या कुछ चल रहा है कि पोल पट्टी खुल जाती क्यों की जाति, जातिवादी,राजनीति, सद्भावना, सामाजिक सहिष्णुता, मॉवलिंचिंग जैसे मामलों को लेकर कई अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन भारत देश की आलोचना कर चुके हैं और चंद्रशेखर आजाद का भाषण ऐसे रिपोर्ट को समर्थन भी करता कोई आश्चर्य नहीं कि ऐसी आलोचनात्मक परिस्थितियों से बचने का एक तरीका यह भी होता है कि व्याख्यान के लिए आमंत्रित व्यक्ति को किसी भी धारा के तहत जेल में डाला जाए और वह विदेश यात्रा के बारे में सोच भी ना सके।

vandana