आखिर उपभोगता की सुपाड़ी किसने ली..?240 रूपए किलो वाला माल लॉक डाउन में 1 हजार रूपए किलो का हो गया…?

आखिर उपभोगता की सुपाड़ी किसने ली..?240 रूपए किलो वाला माल लॉक डाउन में 1 हजार रूपए किलो का हो गया…

बिलासपुर—:बजार किसकी सुपाड़ी ले रहा है और सुपाड़ी दे कौन रहा है यह तो समझ के बाहर है किन्तु इतना तय है कि अब न केवल सरकारी संस्थान साथ ही निजी क्षेत्र खबरों को छुपाने में लगे है कौन किससे बच कर किसके लिए क्या बुलाता है इस सबका केवल अंदाज ही लगाया जा सकता है पर एक बात तय है कि उपभोगता अब राजा नहीं गुलाम है बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर लॉक डाउन के दौरान 3860 किलो सुपाड़ी का कन्साइनमेंट आया अभी बजार में 1 किलो सुपाड़ी एक हजार रूपए कि है लॉक डाउन के पहले 240 प्रतिकिलो थी इस तरह रेलवे के पार्शल भेजी गई सुपाड़ी का दाम लगभग 40 लाख रुपए होता है जबकि रेलवे के कागजो पर 73 हजार रुपए है और इतना बड़ा डॉकेट कागज पर मात्र 200 किलो का अब यह जानना जरुरी है कि पार्शल से आई कच्ची सुपाड़ी गुटका उद्योग के अतिरिक्त कही नही खप सकती क्योकि हजार किलो सुपाड़ी पान की दुकानों पर नही कटने वाली गुटका की कीमत इस समय बढ़कर 20 रूपए प्रति पाउच हो गई यह फुटकर कीमत है 120 रूपए का डिब्बा 300 रूपए का है और आश्चर्य की बात यह है कि रजनीगंधा के इस डिब्बे की एम.आर.पी 270 रूपए है एम आर पी देखकर 300 रूपए में खरीदने वाले उपभोगता बुरा ही मानता उलटे दुकानदार का एहशान मानता है सभी जनते है कि अधिकत्तर जनप्रतिनिधि गुटका खाने के सौकीन है और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को गुटका लाकर देने का काम इन दिनों निगम का बाजार विभाग कर रहा है हाल ही में रायपुर जिले के दो गुड़ाखू सौकीन बाकायदा पास बनवा कर चकरभाठा तक आए और बिलासपुर से दो लोगो ने उन्हें चकरभाठा जा कर गुड़ाखू के एक एक किलो के दो डिब्बे प्रदान किए यह सब कारोबार तब हो रहा है जब जिले की सभी सीमाएं सील है 250 ग्राम गुड़ाखू जो लॉक डाउन के पहले 22 रूपए में मिलती थी अब 200 रूपए में मिल रही है अंदाज लगाए कि एक एक किलो के दो डिब्बे रायपुर से चकरभाठा आकर लेने का ऑपरेशन कितना महेंगा है सौकिनो के पास जेब में पैसा है और वे अपने शौक के लिए कुछ भी कर सकते है ऐसे में रेलवे से आदर्श प्राप्त करते हुए सरकार को इस दो नम्बरके धंधे को समाप्त करने का बीड़ा उठाना चाहिए और ऐसा करने केलिए उसे केवल इन सब कामो को अपने हाथ में लेना होगा बेहतर कार्य यह है की सरकार बंद पड़ी आबकारी दूकान को उसके पूर्व मूल्यों को बदलते हुए खोल दे और शराब की नई कीमत उतनी राखी जाए जो अभी चोरी छुपी बेचीं जा रही है इससे बहु संख्यको पर टैक्स की मार कम पड़ेगी और शौक़ीन लोग सरकार का खजाना भर देंगे

vandana