पूंजीपतियों की गोद में बैठकर श्रमिकों की गर्दन काट रहे योगी—-आजाद।

पूंजीपतियों की गोद में बैठकर श्रमिकों की गर्दन काट रहे योगी—-आजाद

देश के श्रम शक्ति कभी माफ नहीं करेगी बीजेपी को

 

बिलासपुर :—मई के महीने में केंद्र सरकार के इशारे पर जिस तरह से राज्यों में बीजेपी सरकारें श्रमिक कानूनों में फेरबदल कर रही है वह भारत के संविधान की मौलिक प्रस्तावना से छेड़खानी हैं. जिन उद्देश्यों के साथ भारत देश की नीव रखी गई उससे धोखा है  एसपीके चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आज जब पूंजीपति कॉरपोरेट वाद से श्रमिकों को संरक्षण देने का समय है तब बीजेपी उन्हें उल्टा उसके अधिकारों से वंचित कर रही हैं बड़ी कंपनियों ने वैसे ही श्रमिकों का  मनचाहा शोषण किया और एक समय था जब देश की संवेदनशील नेताओं ने श्रमिकों के पक्ष में संविधान के भावनाओं के अनुरूप कानून बनाकर उन्हें संरक्षण दिया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केंद्र के इशारे पर श्रमिकों को उनके सम्मान के साथ जीने के अधिकार से वंचित कर रहे  है  बाबा साहब ने जिस संविधान की रचना की उसके आर्टिकल 21 में सम्मान के साथ जीने का अधिकार शामिल है उत्तर प्रदेश ने जिस तरह से  एक अध्यादेश लाकर श्रमिकों के हित के 35 कानून को एक झटके में समाप्त किया गया इससे भारत की विश्वसनीयता की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धक्का लगा है सरकार ने पूंजीपतियों के गोद में बैठकर उनके कहे अनुसार जो संशोधन किए हैं उससे देश की श्रम शक्ति एक तरफ नाराज है और लॉक डाउन कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए श्रमिक आक्रोशित भी हैं देश का मध्यमवर्ग जो पूरी तरह से निजी नौकरियों पर निर्भर करता है वह योगी सरकार के अध्यादेश से अब निराशा के गर्त में जा रहा है चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जिस तरह नोटबंदी ने देश में हाहाकार खड़ा किया उससे भी गई बीती स्थिति लॉक

डाउन ने की   लॉक डाउन के पूर्व  जिस तरह पूंजीपतियों से चर्चा हुई वैसे ही यदि श्रमिक संस्थानों से राय ली जाती तो आज देश की श्रम शक्ति ना तो भूख से मरती ना पैदल चलकर और ना ही उनकी गर्दन ट्रेन की पटरी पर कटती  यदि राज्यों में और देश में कोई संवेदनशील नेतृत्व होता तो वह एक एक मौत पर व्यक्तिगत रूप से श्रद्धांजलि देते  किंतु उसके विपरीत मन की बात भाइयों बहनों जैसे जुमले और गेरुआ पहनकर अन्य धर्मों को कोसने के अलावा वर्तमान नेतृत्व के पास ऐसे कोई काम नहीं है जिससे आम जनता की आंख के आंसू  पोछे जा सके  पीड़ित जनता एक एक जुल्म और संवेदनशीलता को अपनी छाती पर लिख रही है और सीना ठोक कर 56 इंच का जवाब देगी.

vandana