सर्वहारा वर्ग के मानवाधिकार योगीराज में किताब की शोभा आजाद।

सर्वहारा वर्ग के मानवाधिकार योगीराज में किताब की शोभा आजाद

शीघ्र हालत नहीं सुधरे तो आंदोलन ही रास्ता

बिलासपुर :- भविष्य का विचार किए बिना जो भी प्रशासनिक मुखिया आदेश लागू करता है उसे बाद में पछताना पड़ता है सर्वहारा वर्ग की परेशानियां लॉक डाउन में बढ़ेगी और सरकार को उस पर अभी से ध्यान देना चाहिए यह बात  लॉक डाउन के पहले ही  एएसपी के नेता आजाद ने कही थी किंतु समाज की वास्तविक दशा एवं समस्याओं का आकलन किए बिना योगीराज में अध्यादेश और कानून की दम पर हर मानवीय समस्याओं को हटाकर अपने ही चश्मे से देखा जाता है यही कारण है कि आज सड़क पर रोज दुर्घटना के समाचार आ रहे हैं अस्पताल प्रसव के लिए मयस्सर न  होकर सड़क पर बेटियां जन्म ले रही है और ममता कुछ ही मिनटों बाद फिर पैदल चलने को मजबूर है क्या उत्तर प्रदेश की जनता ने इसी भगवा शासन के लिए वोट दिया था  उन्होंने कहा कि संविधान ने सरकार को लोक कल्याणकारी भावना के साथ चलने का निर्देश दिया है अब सड़क पर चले या नहीं इस पर भी विचार करवाने  न्यायालय जाना पड़ता है सरकार संवेदनाओं से नियंत्रित करना चाहती है. मन की बात, फेसबुक पर, प्रसार भारती पर सुन सुनकर जनता को यह समझ आ चुका है कि  संवाद का पूरा मामला वन वे ट्रेफिक है संबोधन के पहले मेल पर अपने सुझाव भेजने की बात केवल भ्रम फैलाने के लिए है यहां तक कि इस संकटकाल में प्रदेश के डॉक्टर भी कमी की  ओर इशारा नहीं कर सकते हैं कुल मिलाकर लोकतंत्र की हत्या अध्यादेश से की जा रही है  और सड़क पर श्रम शक्ति के मानवाधिकार मशीनें सरकार भी कुचल रही है  यदि यही हाल रहा तो भीम आर्मी और एएसपी को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आंदोलन करना ही पड़ेगा . फराह खान

vandana