गृह विभाग के इमानदार मुखिया के बावजूद नहीं सुधर रही बिलासपुर की पुलिस।

गृह विभाग के इमानदार मुखिया के बावजूद नहीं सुधर रही बिलासपुर की पुलिस

क्या असफल हो रहे हैं माईक -1..?
बिलासपुर :- अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त से ही बिलासपुर पुलिस अधीक्षक का पद कांटो भरा माना जाता है यहां की राजनीतिक फिसलन पर थोराट जैसे कई पुलिस अधिकारी  फिसले और कुछ के  तो पवन के समान कैरियर तबाह हो गया जबकि कुछ अधिकारी जिले में इतने सफल रहे कि उन्हें आज भी शहर के नागरिक याद करते हैं वर्तमान पुलिस अधीक्षक को आए लगभग 1 साल हो रहा है इस दौरान उन्होंने अपना प्रभाव दिखाने टी आई स्तर पर कई प्रयोग किए पर तबादले से पुलिसिंग दुरुस्त होती नहीं दिख रही है एक टीआई पर भरोसा करके उसे थाना देना फिर दूसरा थाना देना फिर तीसरा थाना देना और अंत में भरोसा कम हो जाने पर आजाक भेजना  आखिर तक लाइन ना भेजने के पीछे क्या कारण है ..?जिसे एक घटना के कारण लाइन भेजा पर 40 दिन बाद ही लाइन से बाहर लाकर फिर थाना दे देने का जवाब किसी के पास नहीं है इसी तरह सिविल लाइन थाने से एक टी आई का तबादला कोतवाली हो गया कहते हैं दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री के विरुद्ध तत्काल एफआईआर ने  उन्हें निपटा दिया पर इसी  टीआई ने  पूर्व विधायक के खिलाफ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर एफआईआर की थी तब इनाम मिला था क्या? जिन्हें अभी सिविल लाइन से तोरवा भेजा वे जब कोतवाली में थे तब एक नजूल जमीन को लेकर हाई कोर्ट तक चर्चित थे  किंतु तब नहीं हटाए गए फिर सिविल लाइन जैसे वीआईपी थाना मिला और श्रीराम केयर अस्पताल की जांच के चलते बदले जाने की चर्चा है  किंतु बदलाव के बाद तोरवा जैसे बड़े एरिया मिला तो एक हाथ में रेलवे का लड्डू और दूसरे हाथ में अवैध खनन की बर्फी देता है ऐसे में डिमोशन कहां हुआ लॉकडाउन के दौरान एक टीआई ने तो मंदिर जाकर नमाज तक पढ़ दी पर किसी को वहां समाचार नहीं दिखा टी आई का प्रभाव इतना की  शिवसेना से लेकर बजरंगी तक सोते रहे पुलिसिया पत्रकार कहते हैं कि एसईसीएल क्षेत्र का टीआई माइक 1 का सबसे खास है असल में उसके तार पी एच क्यू से जुड़े हैं और वह जहां भी रहते हैं उनका सूर्य उच्च का रहता है यह भी चर्चा है कि जिले के प्रभारी मंत्री और गृह मंत्री अब परिणाम चाहते हैं और ऐसे में प्रदेश का मुखिया आईएएस के बाद आईपीएस के तबादले कर सकता है और फेरबदल में बिलासपुर जिले का नाम शामिल है….
vandana