ग्राम पंचायत लमेर के जंगल मे कट रहे सागौन के लकड़ी जुमेदार अधिकारी दे रहे है गोलमोल जवाब।

ग्राम पंचायत लमेर के जंगल मे कट रहे सागौन के लकड़ी जुमेदार अधिकारी दे रहे है गोलमोल

 

बिलासपुर । इमारती लकड़ी का पेड़ विधिवत काटना अपने आप में कठिन है और इसलिए लोग निजी जमीन पर लगे हुए सागौन के पेड़ को भी चोरी छुपे जंगल विभाग के अधिकारियों के राय मशवरे के साथ कत्लेआम कर रहे हैं कानूनी पेच ऐसा कि संबंधित अधिकारी भी प्रश्नों का जवाब गोल-गोल दे रहा है पूरी घटना bilaspur से लगे हुए takhatpur तहसील ग्राम लमेर पटवारी हल्का नंबर 52 की है यहां पर आठ सागौन के पेड़ कटने की है। और अभी भी निरंतर पेड़ों की कटाई जारी है भूमि स्वामी नरेंद्र अग्रवाल की जमीन पर 1994 में नर्सरी लगाने के बाद सैकड़ों इमारती लकड़ी के पेड़ लगाए गए ऐसा भूस्वामी का कहना है अब पिछले 4 माह से गुपचुप तरीके से काटे जा रहे हैं नियम तो यह है कि यदि जंगल से इमारती लकड़ी का पेड़ कटेगा तो उसकी विधिवत अनुमति डीएफओ देगा और भूमि निजी होगी या सरकारी इमारत होगी तो अनुमति जिले का डीएम देगा यहां पर ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं हुई रेंजर ने ही यह माना कि पटवारी हल्का नंबर 52 में स्थित भू स्वामी नरेंद्र अग्रवाल की जमीन से सात पेड़ करते और यह पेड़ एक ट्रैक्टर ट्राली में जब हुए। Adhikari के बताए अनुसार यह पेड़ फदहाखार नर्सरी में रखे गए लेकिन अधिकारी इस बात का जवाब नहीं दे पाए जब इमारती लकड़ी का पेड़ जप्त मस्तूरी क्षेत्र में हो रहा है और जंगल विभाग का डिपो masturi और takhatpur दोनों जगह है तो जप्त पेड़ फदहाखार नर्सरी क्यों चला गया आज 10:00 बजे के लगभग आठवें पेड़ की कटाई उस प्लाट का चौकीदार लक्ष्मण सोनवानी स्वयं कर रहा था और उसने कहा कि वह अपने मालिक नरेंद्र अग्रवाल को बता चुका है ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व में कटे हुए 7 पेड़ भी इसी तरह आपसी रजामंदी से निपटा दिए गए यह पेड़ सागवान के हैं और कम से कम 22 से 25 साल पुराने हैं। यदि निजी क्षेत्र के जमीन पर लगे हुए इमारती लकड़ी के पेड़ को काटना हो तो आवेदन पत्र अतिरिक्त कलेक्टर के न्यायालय में पेश किया जाएगा जहां से पहले पटवारी प्रतिवेदन बुलाया जाएगा फिर नायब तहसीलदार स्तर का अधिकारी मौका मुआयना करेगा दावा आपत्ति बुलाई जाएगी और अंत में जिला दंडाधिकारी के कोर्ट से आवेदन पत्र पर निर्णय लिया जाएगा किंतु यह सब प्रक्रिया लमेर ग्राम के गांव के पटवारी हल्का नंबर 52 के भूस्वामी नरेंद्र अग्रवाल द्वारा पूरी नहीं की गई।

vandana