गोधन न्याय योजना से गांवों मेें बढ़े रोजगार के नए अवसर, जिले में तीन करोड़ 73 लाख रूपये से ज्यादा की गोबर खरीदी

गोधन न्याय योजना से गांवों मेें बढ़े रोजगार के नए अवसर, जिले में तीन करोड़ 73 लाख रूपये से ज्यादा की गोबर खरीदी

 

गोधन न्याय योजना से गांवों मेें बढ़े रोजगार के नए अवसर,

जिले में तीन करोड़ 73 लाख रूपये से ज्यादा की गोबर खरीदी,

गौठानों में उत्पादित 25077.23 क्विंटल खाद का विक्रय,

जांजगीर-चांपा, 13 सितंबर 2021/ गोधन न्याय योजना से किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, भूमिहीनों को नयी ताकत मिली है। उन्हें आमदनी और रोजगार का नया जरिया मिला है। साल भर में गौठानों में गोबर बेचने वाले जिले के पशुपालकों, किसानों एवं ग्रामीणों के बैंक खातों में तीन करोड़ 73 लाख रुपए का सीधा भुगतान किया जा चुका है। स्व सहायता समूहों और गौठान समितियों के बैंक खातों में अब तक कुल 50 लाख 32 हजार रुपए के लाभांश एवं भुगतान की राशि का अंतरण किया जा चुका है।  

     छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में निर्मित गौठान और साल भर पहले शुरू हुई गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है। यह योजना ग्रामीणों की अतिरिक्त आय का स्थायी जरिया बन गया है। गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 03 करोड़ 73 लाख रूपए से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है। खरीदे गए गोबर से जिले के लगभग 247 गौठानों में बहुतायत रूप से वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। गौठानों अब तक उत्पादित 25077.23 क्विंटल खाद विक्रय किया गया है। गोधन न्याय योजना में ग्रामीणों की बढ़-चढ़कर भागीदारी में इसे न सिर्फ लोकप्रिय बनाया है बल्कि इसके माध्यम से जो परिणाम हमारे सामने आए हैं वह बेहद सुखद है।

      गोधन न्याय योजना अपने आप में एक ऐसी अनूठी योजना बन गई है, जीसने बहुआयामी उद्देश्यों को अपने आप में समाहित कर लिया है। इस योजना के शुरूआती दौर में लोगों के मन में कई तरह के सवाल और इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं थी, जिसे गौठान संचालन समिति और गौठान से जुड़ी महिलाओं ने निर्मूल साबित कर दिया है। इस योजना से हमारे गांवों मेें उत्साह का एक नया वातावरण बना है। रोजगार के नए अवसर बढ़े हैं। पशुपालकों, ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का जरिया मिला है। महिला स्व सहायता समूहों को को स्वावलंबन की एक नई राह मिली है।

  आजीविका का नया ठौर बना ग्रामीण गौठान – पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ उन्हें चारे-पानी का एक ठौर देने के उदेद्श्य गांवों में स्थापित गौठान और गोधन न्याय योजना के समन्वय से वास्तव में गौठान अब ग्रामीण के आजीविका के नया ठौर बनते जा रहे है। गौठानों में महिला समूहों द्वारा जिस लगन और मेहनत के साथ आयमूलक गतिविधियां सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। वह अपने आप में बेमिसाल है।

गांव शक्ति का केन्द्र रहे हैं – मुख्यमंत्री श्री बघेल

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का कहना है कि हमारे गांव शक्ति का केन्द्र रहे हैं। ग्रामीण संसाधनों ने इतनी शक्ति होती है कि उससे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था संचालित हो। हमें अपनी संस्कृति, अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान से जुड़े रहकर विकास की गति को बढ़ाना हो तो इसका सबसे अच्छा साधन है अपने परम्परागत संसाधनों का सम्मान और मूल्य संवर्धन करते हुए ऐसा विकास, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण जनता की सीधी भागीदारी हो।

रोजगार और उत्पादन का केन्द्र बन रहा गौठान-गोबर को बेचने वाले और खरीदने वाले और उससे वर्मी कम्पोस्ट से लेकर विविध उत्पाद तैयार करने वाले गांव के लोग ही हैं। इससे यह बात स्पष्ट है कि हमारे गांव रोजगार और उत्पादन के केन्द्र बिन्दु बन सकते हैं, जो गांधी जी के ग्राम स्वराज का उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ सरकार सुराजी गांव योजना- नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी और गोधन न्याय योजना के जरिए ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की ओर तेजी से बढ़ रही है।

vandana